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दक्षिण भारत में है अनोखा मंदिर, किन्नरों का होता है 18 दिन का उत्सव, महाभारत से जुड़ी है इसकी कहानी, अर्जुन के पुत्र की होती है पूजा

11 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के कुवगम गांव में अरावन देवता की पूजा की जाती है, कई जगह इन्हें इरावन के नाम से भी जाना जाता है। अरावन देवता महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे और युद्ध के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अरावन देव को किन्नरों का देवता माना जाता है, इसलिए दक्षिण भारत में किन्नरों को अरावनी के नाम से पुकारा जाता है। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां पर अरावन देवता का विवाह किन्नरों से किया जाता है। यह विवाह साल में एक बार किया जाता है और विवाह के अगले दिन ही अरावन देव की मृत्यु हो जाने के साथ ही वैवाहिक जीवन भी खत्म हो जाता है। इसका संबंध महाभारत काल की एक अनोखी घटना से है।   अर्जुन और नाग कन्या उलुपी के पुत्र थे अरावन : महाभारत की कथा के अनुसार, एक बार अर्जुन को द्रोपदी से शादी की एक शर्त के उल्लंघन के कारण इंद्रप्रस्थ से निष्कासित करके एक साल की तीर्थयात्रा पर भेजा गया था। इंद्रप्रस्थ से निकलने के बाद अर्जुन उत्तर-पूर्व भारत की ओर गए, जहां उनका विवाह उलूपी नाम की एक नाग कन्या से हो जाता है। विवाह के कुछ समय बाद..
                 

राजस्थान का चमत्कारी गणेश मंदिर, लोग अपनी हर दुःख और परेशानी को चिट्ठी में लिखकर भेजते है त्रिनेत्र गणेश मंदिर में, भगवान को रोज मिलती है सैंकड़ों चिट्ठियां

11 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. कोई भी शुभ काम करने से पहले भगवान गणेश की पूजा अच्छा शकुन माना जाता है, लेकिन हमारे देश में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भगवान को हर शुभ काम से पहले चिट्ठी भेजकर आमंत्रित किया जाता है। इस गणेश मंदिर में हर समय भगवान के चरणों में चिट्ठियों और निमंत्रण पत्रों का ढेर लगा रहता है। सिर्फ मांगलिक काम में ही नहीं, यहां लोग अपनी तकलीफें और दुःख भी भगवान गणपति को चिट्ठी में लिखकर भेजते हैं। राजस्थान के सवाई माधौपुर से लगभग 10 कि.मी. की दूरी पर रणथंभौर के किले में बना यह गणेश मंदिर अपनी इस बात के लिए प्रसिद्ध है। यहां के लोग घर में कोई भी मांगलिक कार्यक्रम हो तो रणथंभौर वाले गणेश जी के नाम कार्ड भेजना नहीं भूलते।   ऐसे हुई थी मंदिर की स्थापना 10वीं सदी में रणथंभौर के किले को मुगलों ने लंबे समय तक घेरे रखा था। किले में राशन का सामान तक ले जाने का रास्ता रोक दिया गया था। तब राजा हमीर को सपने में गणपति आए और उन्होंने उसे पूजन करने को कहा। राजा ने किले में ही ये मंदिर बनवाया। कहते हैं ये भारत का पहला गणपति मंदिर है। यहां की मूर्ति भी भारत की 4 स्वयं भू मूर्तियों में से एक है। र..
                 

जब सती ने यज्ञकुंड में कर लिया था आत्मदाह, वियोग में शिव ने बहाए थे आंसू, पाकिस्तान में है वो जगह जहां बैठकर रोए थे भोलेनाथ

16 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ कुंड में जब सती ने आत्मदाह किया था, तो उनके वियोग में भगवान शिव ने अपनी सुध-बुध लगभग खो दी थी। भारत की भूमि पर वो जगह आज भी मौजूद है जहां भगवान शिव ने सती को याद करते हुए आंसू बहाए थे। उनके आंसुओं से दो कुंड बने उसमें से एक कुंड का नाम है कटाक्ष कुंड। ये कटाक्ष कुंड और उस जगह बना शिव मंदिर अब विभाजन के बाद पाकिस्तान में है। शिव के आंसुओं से जो दूसरा कुंड बना था वो भारत में राजस्थान के पुष्कर तीर्थ में है। इस तरह दोनों जगहों को आपस में गहरा संंबंध है।     कटसराज मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 कि.मी. की दूरी पर कटस नामक स्थान में एक पहाड़ी पर है। कहा जाता है कि यहमंदिर महाभारत काल (त्रेतायुग) में भी था। इस मंदिर से जुड़ी पांडवों की कई कथाएं प्रसिद्ध हैं। मान्यताओं के अनुसार, कटसराज मंदिर का कटाक्ष कुंड भगवान शिव के आंसुओं से बना है। इस कुंड के निर्माण के पीछे एक कथा है। कहा जाता है कि जब देवी सती की मृत्यु हो गई, तब भगवान शिव उन के दुःख में इतना रोए की उनके आंसुओं से दो कुंड बन गए।   पांडवों ने किया..
                 

पाक अब खोलेगा करतारपुर साहिब का रास्ता, गुरुनानक देव के जीवन का अंतिम समय गुजरा था यहां, पटियाला के महाराज ने 1.35 लाख रुपए में बनवाया था

17 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. सिख समुदाय के लिए आज एक बड़ी खबर आई है। पाकिस्तान जल्दी ही करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का रास्ता भारत के लिए खोलने वाला है। सिख समाज में करतारपुर साहिब सबसे खास गुरुद्वारों में से एक है। ये ही वो जगह है जहां सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए थे। 22 सितंबर 1539 को यहीं अपनी देहत्यागी थी। ये गुरुद्वारा ठीक उसी जगह बना है। पाकिस्तान में लाहौर से करीब 120 किमी दूर नरोवल जिले में ये गुरुद्वारा मौजूद है। सिख समाज के लोग इस स्थान के लिए गहरी आस्था रखते हैं लेकिन पाकिस्तान और भारत के बिगड़े संबंधों के कारण यहां जा नहीं पा रहे थे। अभी पाकिस्तान ने इसके लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं भेजा है लेकिन यह तय माना जा रहा है कि जल्दी करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए पाकिस्तान रास्ता खोल देगा। इस गुरुद्वारे की जगह पर नानक देवजी ने अपने जीवन के आखिरी साल गुजारे थे। सिख पंथ को यहां स्थापित और मजबूत करने के लिए काफी काम किया था। उनके देह त्यागने के बाद यहां गुरुद्वारा बनवाया गया। इतिहास कहता है कि पटियाला के महाराज भूपिंदर सिंह ने 1 लाख 35 हजार रुपए दिए थे..
                 

गुजरात से राजस्थान लाई गई थी भगवान गणपति की ये चमत्कारी माने जाने वाली मूर्ति, सैंकड़ों साल पुरानी है ये प्रतिमा

19 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. मोती डूंगरी गणेश मन्दिर राजस्थान में जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित खास मंदिर  है। लोगों की इसमें विशेष आस्था तथा विश्वास है। गणेश चतुर्थी पर यहां काफ़ी भीड़ रहती है और दूर-दूर से लोग भगवान मोती डूंगरी के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा जयपुर के राजा माधोसिंह प्रथम की रानी के पीहर मावली से यहां लाई गई थी। मावली में यह प्रतिमा गुजरात से लाई गई थी। माना जाता है कि उस समय यह गणेश प्रतिमा पांच सौ साल  पुरानी थी। इस प्रतिमा को मावली से जयपुर पल्लीवाल नाम के एक सेठ लेकर आए थे और उन्हीं की देखरेख में मोती डूंगरी मंदिर बनवाया गया था। ऐसा है मंदिर का स्वरूप यह गणेश मंदिर साधारण शैली से बना एक सुंदर मंदिर है। मंदिर के सामने कुछ सीढ़ियां और तीन दरवाजे हैं। मंदिर के पीछे के भाग में मंदिर के पुजारी रहते हैं। यहां दाहिनी सूंड़ वाले गणेशजी की विशाल प्रतिमा है, जिस पर सिंदूर का चोला चढ़ाकर भव्य श्रृंगार किया जाता है। हर बुधवार को यहां होती है नए वाहनों की पूजा मंदिर में हर बुधवार को न..
                 

मध्य प्रदेशः वनवास के दौरान यहां से गुजरे तो भगवान राम को भी होने लगी थी कई तरह की चिंताएं, समझा जगह का दोष और स्थापित किए चिंताओं के हरने वाले गणेश

20 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के दौरान महाकाल वन के बाहरी इलाके से गुजरे तो वहां राम को कई तरह की चिंताएं सताने लगीं। हमेशा धीर-गंभीर रहने वाले भगवान राम का मन जब व्याकुल हुआ तो उन्हें समझ आया कि इस जगह में कोई ऐसा दोष है, जिसके कारण उनका मन बेचैन है। बस भगवान राम ने इस जगह के दोष को दूर करने के लिए तत्काल सभी की चिंता हरने वाले चिंताहरण गणेश की स्थापना कर दी। मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में गणेशजी का एक सिद्ध स्थान है, जिसका नाम है चिंतामन गणेश मंदिर, ये वही चिंताहरण गणपति हैं जिसकी स्थापना भगवान श्रीराम ने की थी। यहां आने वाले भक्तों की सभी चिंताएं गणेशजी दूर करते हैं। इसीलिए इन्हें चिंतामन गणेश कहा जाता है।   श्रीराम ने वनवास काल में की थी इस मंदिर की स्थापना पुरानी मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। श्रीराम वनवास के दौरान उज्जैन भी आए थे। जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ इस क्षेत्र के वन में घूम रहे थे, तब सीता को प्यास लगी। सीता की प्यास बुझाने के लिए लक्ष्मण ने अपने बाण से एक बावड़ी बना दी थी। ये बावड़ी चिंताम..
                 

मथुरा में हुआ था श्रीकृष्ण का जन्म, नंद गांव में बीता बचपन और पढ़ने गए उज्जैन में, 3 और जगहें जहां से श्रीकृष्ण का है खास कनेक्शन

23 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण विष्णु के सबसे श्रेष्ठ अवतार माने जाते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ, बचपन नंद गांव में बीता और शिक्षा उज्जैन में प्राप्त की। आज भी इन स्थानों पर श्रीकृष्ण की निशानियां मंदिर या अन्य रूपों में देखी जा सकती हैं। जन्माष्टमी के मौके पर हम आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे श्रीकृष्ण का खास संबंध रहा है। 1. मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा स्थित कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म हुआ था। अब यहां कारागार तो नहीं है, लेक‌िन अंदर का नजारा इस तरह बनाया गया है क‌ि आपको लगेगा क‌ि हां यहीं पैदा हुए थे श्रीकृष्‍ण। यहां एक हॉल में ऊंचा चबूतरा बना हुआ है, मान्यता हैं यह चबूतरा उसी स्‍थान पर है जहां श्रीकृष्‍ण ने धरती पर पहला कदम रखा था। 2. नंद गाव में बना नंदराय मंदिर कंस के भय से वसुदेवजी यहीं नंदराय और माता यशोदा के पास श्रीकृष्‍ण को छोड़ गए थे। यहां नंदराय जी का न‌िवास था और श्रीकृष्‍ण का बालपन गुजरा था। आज यहां भव्य मंद‌िर है, यहीं पास में एक सरोवर है, ज‌ि..
                 

नैनीताल के नीम करौली बाबा और यहां का हनुमान मंदिर एप्पल और फेसबुक से अपने खास कनेक्शन के लिए है फेमस, यहां मिलती है जीवन को बदलने की शक्ति

26 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. नैनीताल के निकट कैंची में नीम करौली माता का बड़ा ही प्रसिद्ध मंदिर और नीम करौली बाबा का आश्रम बना हुआ है। ये मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है, लेकिन 2017 में यह जगह तब कुछ ज्यादा ही सुर्ख़ियों में आई थी जब फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान इस जगह का जिक्र किया औऱ अपने यहां आने की बात बताई।   जुकरबर्ग ने मोदी को बताया कि जब फेसबुक बुरे दिनों से गुजर रहा था तब वो कैसे भारत के इस मंदिर में गए थे और वहां से प्रेरणा रुपी शक्ति लेकर आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। साथ ही जुकरबर्ग ने ये भी बताया कि वो इस मंदिर में एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स के कहने पर गए थे।   चमत्कारी है यहां का मंदिर और नीम करौली बाबा- नैनीताल के भवाली-अल्मोड़ा हाई-वे पर बने कैंची धाम मंदिर में हर साल देश और दुनिया से लाखों लोग पहुंचते हैं। यहां पर हनुमान जी का मंदिर है। आश्रम का नाम यहां के पुजारी स्वर्गीय नीम करौली बाबा के नाम पर पड़ा है। बाबा के चमत्कार के किस्सों से ये पूरा इलाका भरा पड़ा है। बताते हैं कि वो खुद गायब और प्रगट हो सकते थे..
                 

पति को ऐसे समय में ही मालुम होता है कैसी है उसकी पत्नी

26 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
पुरानी मान्यताओं के अनुसार पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का माना जाता है। इसी वजह से आज भी पति-पत्नी अपने रिश्ते को बनाए रखने के लिए कई प्रयास करते हैं। वही रिश्ता लंबे समय तक सुख और खुशियां देने वाला हो सकता है जहां दो लोग एक-दूसरे को बहुत अच्छे से समझते हैं। समझने के लिए एक-दूसरे की परख होना बहुत जरूरी है। यहां जानिए आचार्य चाणक्य ने बताया पत्नी की परख किस समय होती है- नीचे दी गई लिंक्स पर भी क्लिक करें... पढ़िए खास चाणक्य नीतियां ध्यान रखें, ऐसे पुरुषों में होती है कामवासना की अधिकता जानिए दिसंबर-2013 तक किस राशि के लोग हो जाएंगे मालामाल दूध के कमाल जानेंगे तो आप भी मानेंगे दूध भी है चमत्कारी समझिए, हथेली की ये 1 रेखा कर देती है FINAL आप करोड़पति बनेंगे या नहीं ऐसे पुरुषों से ज्यादा आकर्षित होती हैं महिलाएं ऐसे भी जान सकते हैं यदि किसी पुरूष को वैसी शारीरिक कमजोरी है जेब में पैसा भरा रहेगा, शनिवार को करें तेल और रोटी का ये उपाय बहुत कम लोग जानते हैं गायत्री मंत्र की खास बातें और चमत्कारी उपाय नींबू के चमत्कार जानेंगे तो आप भी मानेंगे काम की चीज है... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के ..
                 

उत्तर प्रदेश का एक शिव मंदिर जिस पर पड़ी थी महमूद गजनवी की बुरी नजर, अब यहां पूजा भी होती है और नमाज भी

29 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क.  शिव मंदिर हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र माना जाता है। दुनियाभर में मौजूद सभी हिंदू पूरी आस्था और विश्वास से भगवान शिव की पूजा करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी शिव मंदिर में मुस्लिम भी नमाज अदा करते हैं। भारत में एक शिव मंदिर ऐसा भी है, जहां पर हिंदू भगवान शिव का जल से अभिषेक करते है, वहीं मुस्लिम भी अपनी नमाज अदा करते हैं। उत्तरप्रदेश के गोरखपुर जिले से कुछ दूरी पर सरया तिवारी एक गांव है। इस गांव में भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है, इसका नाम झारखंडी महादेव है। यह मंदिर बहुत ही खास और अनोखा है।   क्यों पढ़ी जाती है इस शिव मंदिर में नमाज इसके पीछे की कहानी महमूद गजनवी से जुड़ी है। कहानी के अनुसार, इस शिवलिंग की महिमा और प्रसिद्ध सुनने पर मेहमूद गजनवी ने इसे तोड़ने की बहुत कोशिश की। अपनी पूरी ताकत लगाने पर भी वह इसे तोड़ नहीं पाया। शिवलिंग को न तोड़ पाने पर उसने इस पर कुरान का एक कलमा लिखवा दिया, ताकि इस शिवलिंग की प्रसिद्ध कम हो जाए और हिंदू इसकी पूजा करना बंद कर दे। मेहमूद के कलमा लिखवाने के बाद इस शिवलिंग की प्रसिद्धि कई गु..
                 

असम, पश्चिम बंगाल, और हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों की तरह चमत्कारी है मध्य प्रदेश का देवी मंदिर, वैष्णों देवी की तर ही बसा है ऊंचे पहाड़ पर, इन्हें कहा जाता है शारदा माई

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. देश में माता दुर्गा के 51 शक्तिपीठ माने गए हैं। असम की कामाख्या देवी, पश्चिम बंगाल की काली माता और हिमाचल प्रदेश की ज्वाला देवी व कालका माता की तरह ही मध्य प्रदेश में भी माता का एक चमत्कारी शक्ति पीठ है। उत्तर भारत में जैसे लोग मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहाड़ों को पार करते हुए वैष्णो देवी तक पहुंचते हैं। ठीक उसी तरह मध्य प्रदेश के सतना जिले में भी 1063 सीढ़ियां चढ़ कर माता के दर्शन करने जाते हैं। सतना जिले की मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर बने माता के इस मंदिर को मैहर देवी का मंदिर कहा जाता है। मैहर का मतलब है मां का हार। पुराणों में बताया गया है कि देवी सती के जले हुए शव से उनका हार इस जगह गिरा था। इसलिए इस जगह का नाम मैहर या मैेय्हर पड़ा। मैहर नगर से 5 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर माता शारदा देवी का वास है। पर्वत की चोटी के मध्य में ही शारदा माता का मंदिर है। इस मंदिर को सतना के जंगलों में सबसे पहले आल्हा और उदल नाम के भाइयों ने देखा था। माना जाता है दोनों ने ही इस मंदिर में मां को शारदा माई के नाम से पुकारा था और रोज उनके दर्शन करने आते थे। माना जाता है ये दोनो..
                 

टूरिज्म के हैवन थाईलैंड में है टेंपल ऑफ हेल, इंसान को अपने पापों की सजा के बारे में जीते जी पता चले इसलिए एक बौद्ध भिक्षु ने बनवाया था नर्क का मंदिर

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. थाईलैंड में यूं तो सैंकड़ों मंदिर हैं लेकिन टेंपल ऑफ हेल यानी नर्क का मंदिर सबसे अलग है। थाईलैड के बैंकॉक से करीब 700 किमी दूर चियांग माय में बना ये मंदिर मूलतः एक बौद्ध भिक्षु ने बनवाया था। यहां ग्रंथों में बताए सभी नर्कों के बारे में बताया गया है, किस नर्क में कैसी सजा मिलती है, ये यहां बनी मूर्तियां बताती हैं। यहां टूरिस्ट किसी देवता की पूजा नहीं करते बल्कि मृत्यु के बाद आत्मा को पापों के लिए मिलने वाली सजाओं को देखने आते हैं। मंदिर में कई मूर्तियां हैं, जो पाप के बदले नर्क में दी जाने वाली पीड़ाओं को दर्शाती हैं।   कहां है यह नर्क मंदिर इस मंदिर सनातन धर्म और बौद्ध धर्म से प्रेरित है। इस मंदिर की सभ्यता तथा संस्कृति पर भी काफी हद तक भारतीय प्रभाव देखा जा सकता है। थाईलैंड की राजधानी बैंकाक से लगभग 700 किलोमीटर दूर चियांग माय शहर में लगभग 300 मंदिर हैं लेकिन यह नर्क मंदिर अपने आप में न केवल अनूठा है बल्कि पूरी दुनिया का इकलौता मंदिर है।   बौद्ध भिक्षु ने इसलिए बनवाया था यह मंदिर इस मंदिर को बनाने का मूल विचार एक बौद्ध भिक्षु प्रा क्..
                 

80 साल से यहां विवादों का निपटारा करती आ रही है बजरंगी पंचायत, भगवान हनुमान को साक्षी मान कर पंच करते हैं फैसला, सबको होता है मान्य

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. भगवान की पूजा-अर्चना केवल मनोकामनाएं पूरी करने के लिए नहीं बल्कि सही और गलत की पहचान करने के लिए भी की जाती है। इसी बात का जीवंत उदाहरण मौजूद है छत्तीसगढ़ में। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के मगरपारा में क्षेत्र में एक अनोखा हनुमान मंदिर है, जहां गांव का हर फैसला भगवान हनुमान खुद करते हैं। जहां शहर में पहले से ही उच्च न्यायालय होने के बावजूद भी ज्यादातर विवादों का निपटारा भगवान हनुमान के मंदिर में होता है। भगवान हनुमानजी सभी के दुखों को हरने वाला माने जाते हैं, उनके आदेश से ही इस क्षेत्र के मसलों का हल निकाला जाता है।   बजरंगी पंचायत मंदिर बिलासपुर के इस क्षेत्र में एक ‘बजरंगी पंचायत’ नामक मंदिर है, जहां पिछले 80 साल से विवादों पर फैसलों के लिए हनुमानजी की शरण ली जाती है। किसी को, कैसी भी, कोई भी समस्या हो, वह उसका हल पाने के लिए बजरंगी पंचायत मंदिर में पहुंच जाता है। हनुमानजी करते हैं फैसला मंदिर के प्रमुख का कहना है कि मंदिर में आज भी अपने क्षेत्र से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर लोग इकट्ठे होते हैं। यहां हर प्रकार की समस्या ..
                 

जब धरती पर बढ़ गया था शनि का भयंकर प्रकोप, लोग हो रहे थे परेशान, तब भगवान हनुमान ने सिखाया था शनिदेव को सबक

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अलग है। अक्सर ये कहा जाता है कि महिलाओं को शनि की पूजा नहीं करनी चाहिए, शनि को छूना औरतों के लिए वर्जित है। लेकिन, एक ऐसा मंदिर भी है, जहां खुद शनिदेव हनुमानजी के पैरों में औरत के वेष में बैठे हैं। कहानी है कि एक बार धरती पर शनि का प्रकोप बहुत बढ़ गया तो हनुमानजी ने लोगों के कष्ट दूर करने के लिए शनि देव को सबक सिखाने की ठानी। हनुमानजी के डर से शनि ने औरत का रूप धरा और उन्हीं की शरण में बैठ गए।   गुजरात में भावनगर के सारंगपुर में भगवान हनुमान का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे कष्टभंजन हनुमानजी के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर अपने आप में ही खास है, क्योंकि इस मंदिर में भगवान हनुमान के साथ शनिदेव विराजित हैं। इतना ही नहीं यहां पर शनिदेव स्त्री रूप मेंहनुमान के चरणों में बैठे दिखाई देते हैं। ऐसा होने के पीछे एक पौराणिक कथा है।   क्यों हनुमान के पैरे में स्त्री रूप में बैठे हैं शनिदेव पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि एक समय शनिदेव का प्रकोप काफी बढ़ गया..
                 

शनि देव की पूजा के ये 4 आसान उपाय खोल देते हैं किस्मत का दरवाजा

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
                 

शनिवार को हनुमान जी को चोला चढ़ाते समय करें इस मंत्र का जाप, दूर हो सकती हैं सभी बाधाएं

2 months ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
शनिवार को हनुमानजी का दिन माना जाता है और इस दिन की पूजा-अर्चना की जाती है ताकि भगवान सुख हो जाएं और भक्तों की मनोकामना पूरी करें। शनिवार को अक्सर ही देखा जाता है कि हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर (चोला) चढ़ाया जाता है। चोला चढ़ाते समय अगर आप एक खास मंत्र का जाप करेंगे जो आपके काम में आ रहीं रूकावटें दूर हो सकतीं हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था सुखी जीवन का रहस्य , मरने के बाद कौन लोग जाते हैं स्वर्ग

2 months ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
महाभारत के अश्वमेधादिक पर्व में युधिष्ठिर और भगवान कृष्ण की बातचीत है। युधिष्ठिर के सवालों पर कृष्ण ने उन्हें जवाब दिए। युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि किन लोगों का जीवन हमेशा सुखी रहता है, कौन से वो लोग होते हैं जो मरने के बाद स्वर्ग जाते हैं, या मोक्ष प्राप्त करते हैं। भगवान कृष्ण ने इस बात को एक श्लोक में बताया है। श्लोक के अनुसार, जो मनुष्य ये 4 आसान काम करता है, उसे निश्चित ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

राजस्थान में है वो जगह जहां विष्णु ने लिया था पहला अवतार, परशुराम ने किया था हिंसा का प्रायश्चित, भगवान सूर्य की भी एक कहानी है इस जगह की पहचान

20 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. राजस्थान के शेखावटी इलाके के झुंझुनूं जिले से 70 कि.मी. दूर अरावली पर्वत की घाटी में बसे उदयपुरवाटी कस्बे से करीब दस कि.मी. की दूरी पर स्थित है लोहार्गल। जिसका अर्थ होता है जहां लोहा गल जाए। यह राजस्थान का पुष्कर के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ है। इस जगह पर पांडवों से साथ एक चमत्कार हुआ था। उनके अलावा इस जगह का सम्बन्ध भगवन परशुराम, भगवान सूर्य और भगवान विष्णु से भी है।   यहां गले थे पांडवों के हथियार महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था, लेकिन जीत के बाद भी पांडव अपने परिजनों की हत्या के पाप से चिंतित थे। लाखों लोगों की हत्या के पाप का दर्द देख श्रीकृष्ण ने उन्हें बताया कि जिस तीर्थ स्थल के तालाब में तुम्हारे हथियार पानी में गल जाएंगे, वहीं तुम्हारा मनोरथ पूर्ण होगा। घूमते-घूमते पाण्डव लोहार्गल आ पहुंचे तथा जैसे ही उन्होंने यहां के सूर्य कुण्ड में स्नान किया, उनके सारे हथियार गल गये। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव की आराधना कर मोक्ष की प्राप्ति की।   यहां भगवान विष्णु ने लिया था मत्स्य अवतार यह क्षेत्र पहले ब्रह्मक्षेत्र था। माना जाता है कि ..
                 

पंजाब का शहीद बाबा निहालसिंह गुरुद्वारा जाना जाता है अपनी अलग खासियत के लिए, जिन्हें वीजा मिलने में होती है समस्या वो आते हैं अपनी मन्नत लेकर

24 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. 1 सितंबर 2018 को गुरुग्रंथ साहिब प्रकाश पर्व है। अपनी अलग-अलग खासियतों के लिए देश के कई धार्मिक स्थल प्रसिद्ध हैं। लोग अपनी मन्नतों के लिए तरह-तरह के चढ़ावे चढ़ाते हैं। लेकिन, पंजाब के जालंधर में एक गुरुद्वारा ऐसा भी है जो विदेश जाने की इच्छा रखने वालों के लिए खास है। जालंधर के शहीद बाबा निहालसिंह गुरुद्वारा सभी गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों से अलग है। यहां विदेश जाने के लिए मनचाहे देश का वीजा मिलने की मन्नतें मांगी जाती हैं और चढ़ावे के रुप में यहां खिलौने का हवाई जहाज चढ़ाया जाता है।   जालंधर के दोआबा क्षेत्र, तल्हण गांव में मौजूद यह गुरुद्वारा वीजा वाले गुरुद्वारे के नाम से भी प्रसिद्ध है। यहां खिलौने के हवाई जहाज चढ़ाने की मान्यता इतनी गहरी है कि गुरुद्वारे के बाहर मौजूद हर दुकान पर 100 से लेकर हजार रुपए तक के हवाई जहाज बिकते हैं। रविवार को इन हवाई जहाजों की बिक्री सबसे ज्यादा होती है। आम दिन की अपेक्षा रविवार को हजारों की संख्या में यहां हवाई जहाज चढ़ाए जाते हैं। गुरुद्वारा प्रबंध समिति इन हवाई जहाजों को आसपास के बच्चों में बांट देती है।..
                 

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड के 5 मंदिर हैं सबसे अलग, इनके निर्माण के पीछे है कोई ना कोई रहस्यमयी कहानी जो आज भी सुनाई जाती है इन मंदिरों में

26 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनसे जुड़े इतिहास और रहस्यों के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। ऐसे ही 5 भव्य मंदिरों को लेकर मान्यता है कि इन मंदिरों का निर्माण केवल एक रात में हुआ है। ये यकीन करना तो मुश्किल है लेकिन इन मंदिरों के इतिहास में या इन मंदिरों में दर्शन करने वालों को ये ही कहानियां सुनने को मिलती हैं। लेक‌िन, इन मं‌द‌िरों को देखने के बाद इस बात पर विश्वास कर पाना बड़ा मुश्किल होता है क्योंक‌ि ये मंद‌िर इतने व‌िशाल हैं क‌ि इस तरह के मंद‌िर बनवाने शुरू करें तो वर्षों लग जाएंगे। लेक‌िन कथाएं और मान्यताएं तो यही कहती हैं क‌ि एक चमत्कार की तरह यह मंद‌िर रात भर में बनकर तैयार हो गए।   अब आपको बताते हैं कौन-से हैं वे 5 भव्य मंदिर -   1. गोविंद देवजी मंदिर (वृंदावन) भगवान श्री कृष्‍ण की लीलास्‍थली वृंदावन में गोव‌िंद देव जी का मंद‌िर है। इस मंद‌िर के न‌िर्माण की कथा भी कृष्‍ण की लीला की तरह अद्भुत है। कहते हैं क‌ि यह मंद‌िर एक रात में बन..
                 

राहुल गांधी जाएंगे कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर, शिव का निवास माना जाने वाला कैलाश फिलहाल है चीन के कब्जे वाले तिब्बत में, चार धर्मों के लोगों के लिए है खास

26 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
    रिलिजन डेस्क. भगवान शिव का निवास स्थान कहे गए कैलाश मानसरोवर चर्चा में है। कारण है कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसकी यात्रा पर जाने की घोषणा की है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा को सबसे दुर्गम और कठिन तीर्थ यात्राओं में गिना जाता है। कैलाश मानसरोवर महादेव का घर है। शास्त्रों में इसके बारे में काफी लिखा गया है।   कैलाश मानसरोवर भगवान शिव से संबंधित सबसे खास जगह मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कैलाश पर भगवान शिव के साथ-साथ भगवान कुबेर का भी निवास स्थल माना जाता है। कैलाश धर्म की नजर से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद सुंदर और रोचक भी है। भगवान शिव ने रावण द्वारा लंका से भगाए गए कुबेर को कैलाश पर रहने की अनुमति दी थी। ये शिव के साथ कुबेर का भी घर है। यहां उनका अपनी यक्ष जाति के लोगों के साथ निवास माना गया है। कैलाश मानसरोवर का जो सरोवर है, उसे सबसे पवित्र जल स्त्रोतों में माना जाता है। मानसरोवर का अर्थ है मन का सरोवर। कहा जाता है शिव ने अपने मन से इसकी रचना की थी।   जब रावण ने उठाने की कोशिश की कहा जाता है कि एक बार रावण ने घो..
                 

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र में भगवान हनुमान के 10 मंदिर, शनिवार को करनी चाहिए हनुमानजी की पूजा, शनि नहीं करता परेशान

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. शनिवार को शनिदेव की पूजा का जितना महत्व है, उससे ज्यादा हनुमानजी की आराधना का महत्व है। शनि की दी हुई हर पीड़ा का निदान हनुमानजी की आराधना से होता है। भगवान हनुमान को शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हनुमान एक ऐसे देवता हैं, जिनका मंदिर हर स्थान पर आसानी से मिल जाता है। कलियुग में सबसे ज्यादा भगवान शंकर के ग्यारहवें रुद्र अवतार हनुमानजी को ही पूजा जाता है। इसीलिए, हनुमानजी को कलियुग का जीवंत देवता भी माना जाता है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र में भगवान हनुमानजी के कई चमत्कारी मंदिर हैं। आज हम हम आपको इन्हीं विशेष 10 मंदिरों के बारे में बता रहे हैं। कर्नाटक का हंपी शहर जो रामायण काल का किष्किंधानगर भी माना जाता है, इस दौर का सबसे प्राचीन सिद्ध स्थान है, जहां भगवान हनुमान का जन्म माना जाता है।   ये हैं वो मंदिर- 1. हनुमान मंदिर, इलाहबाद (उत्तर प्रदेश) - इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए भगवान हनुमान की प्रतिमा वाला प्राचीन मंदिर है। इसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। मूर्ति 20 फीट लम्बी है। जब बारीश में बाढ़ आती ह..
                 

उत्तर प्रदेश, हिमाचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात के ये एक-एक शिवलिंग हैं बहुत खास, लगातार बढ़ रहा है इनका आकार, कोई तिल तो कोई जौ के बराबर बढ़ रहा है हर साल

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
     रिलिजन डेस्क. भारत में कई चमत्कारी मंदिर हैं। हर किसी की अपनी-अपनी मान्यता है। लेकिन, उत्तर-प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और हिमाचल के एक-एक शिव मंदिर ऐसे हैं जो अपने चमत्कार के कारण विज्ञान के लिए भी आश्चर्य का विषय बने हुए हैं। इन पांच मंदिरों में एक कॉमन विशेषता ये है कि यहां पांचों शिवलिंगों का आकार अपने आप हर साल बढ़ जाता है। इन सभी शिवलिंगों की मान्यताएं अलग-अलग हैं, कहानियां अलग हैं लेकिन सभी की ये एक खासियत इन्हें बाकी शिवलिंगों से अलग बनाती हैं।     जानिए कौन से हैं वे 5 चमत्कारी शिवलिंग और उनसे जुड़ी मान्यताएं-   1. पौड़ीवाला शिव मंदिर (नाहन, हिमाचल प्रदेश) ह‌िमाचल प्रदेश में नाहन से लगभग 8 क‌िलोमीटर की दूरी पर पौड़ीवाला श‌िव मंद‌िर है। इसका संबंध रावण से माना जाता है। कहते हैं क‌ि रावण ने इसकी स्‍थापना की थी। इसे स्वर्ग की दूसरी पौड़ी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है क‌ि हर वर्ष महाश‌िवरात्र‌ि पर यह श‌िवल‌िंग एक जौ के दाने के बराबर बढ़ता है। ऐसी धार..
                 

सोमनाथ है पहला ज्योतिर्लिंग, चंद्रमा ने की थी इसकी स्थापना और पाई थी श्राप से मुक्ति, ज्योतिर्लिगों से जुड़ी ऐसी ही खास और रोचक बातें

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। शिवमहापुराण के अनुसार, एकमात्र शिव ही ऐसे देवता हैं, जो निष्कल व सकल दोनों हैं। यही कारण है कि शिव का पूजन लिंग व मूर्ति दोनों रूपों में किया जाता है। भारत में 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। इन सभी का अपना महत्व व महिमा है। ऐसी मान्यता भी है कि सावन में अगर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए जाएं तो जन्म-जन्म के कष्ट दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि इस महीने में भारत के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता हैं। आज हम आपको बता रहे हैं इन 12 ज्योतिर्लिगों का महत्व व महिमा-   1. सोमनाथ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं बल्कि इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चन्द्रदेव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है। 2...
                 

कलयुग के जीवित देवता हैं भगवान हनुमान, शास्त्र कहते हैं इस धरती पर कैलाश के पास मौजूद पहाड़ पर है उनका निवास, फिलहाल है चीन के कब्जे में

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. भगवान हनुमान को अष्ट चिरंजीवी में एक माना जाता है। यानी उन आठ लोगों में जो अनंत काल से जीवित हैं और हमेशा रहेंगे। भगवान हनुमान जीवित हैं, शास्त्रों ने एक पहाड़ पर उनका निवास बताया है। गंधमादन नाम के पहाड़ का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है, जिस पर भगवान हनुमान का वास माना गया है। जहां वे अपनी रामभक्ति में लीन हैं। भारत में गंधमादन नाम के दो पहाड़ है, एक भारत-चीन बार्डर पर तिब्बत के क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर के नजदीक और एक रामेश्वरम दक्षिण भारत में।   माना जाता है मूल गंधमादन पर्वत यही तिब्बत के क्षेत्र में हैं, जिस पर फिलहाल चीन का कब्जा है। शास्त्रों में लिखा है कैलाश के पास स्थित गंधमादन पर्वत पर ही हनुमान का निवास है। जिस तरह भगवान शिव का निवास स्थल कैलाश चीन के कब्जे में है, उसी तरह हनुमान का निवास स्थल भी चीन के ही कब्जे में है। दक्षिण भारत में रामेश्वरम के पास मौजूद गंधमादन पर भी हनुमान जी और भगवान राम से जुड़े मंदिर और कुछ निशान हैं।   यहीं भीम से मिले थे हनुमान पुराणों के अनुसार, कलियुग में  हनुमान गंधमादन पर्वत पर नि..
                 

Myth: हिमाचल के कांगड़ा में शक्तिपीठ के पास है शिव के सेनापति भैरव का मंदिर, भगवान की इस मूर्ति की आंखों से बहते हैं आंसू

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क. देव भूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश में कई चमत्कारी मंदिर हैं। ये प्रदेश अपने माता दुर्गा के मंदिरों में के लिए प्रसिद्ध है, जहां ज्वाला देवी, कालका देव, कांगड़ा देवी आदि के मंदिर हैं। लेकिन इसी देव भूमि पर भगवान शिव के सेनापति भगवान भैरव का भी मंदिर है। इस मंदिर को भी बहुत चमत्कारी और सिद्ध माना जाता है। मान्यता है कि जब भी यहां कोई विपत्ति आती है तो भगवान भैरव की मूर्ति की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं। ये संकट का पूर्व संकेत होते हैं।   कांगड़ा में बज्रेश्वरी देवी माता का मंदिर है। इस मंदिर में देवी के साथ भगवान भैरव की भी ये चमत्कारी मूर्ति है। मंदिर परिसर में ही भगवान लाल भैरव का भी मंदिर है। यहां विराजे भगवान लाल भैरव की यह मूर्ति करीब पांच हजार वर्ष पुरानी बताई जाती है। कहते हैं कि जब भी कांगड़ा पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो इस मूर्ति की आंखों से आंसू और शरीर से पसीना निकलने लगता है। तब मंदिर के पुजारी विशाल हवन का आयोजन कर मां से आने वाली आपदा को टालने का निवेदन करते हैं और यह बज्रेश्वरी शक्तिपीठ का चमत्कार और महिमा ही है कि आने वाली हर आपदा मां के आश..
                 

देवशयनी एकादशी 23 जुलाई को : इस दिन व्रत करने से पापों का होता है नाश, 4 महीनों तक नहीं होते शुभ कार्य

2 months ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
षाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस साल ये एकादशी 23 जुलाई को पड़ रही है। देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी, पद्मनाभा तथा प्रबोधनी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

सुख-समृद्धि के लिए शुक्रवार को करें ये उपाए, प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में हो सकता है फायदा

2 months ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
ज्योतिष के अनुसार में शुक्र ग्रह को पैसा, सुख और प्रसिद्धि देने वाला माना गया है। लेकिन शुक्र अगर अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति को सुख-सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इसके अलावा उसे वैवाहिक जीवन में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं शुक्रवार लक्ष्मी जी का भी दिन है। इसीलिए इन दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए और सुखी वैवाहिक जीवन व सुख समृद्धि लिए आप ये उपाय कर सकते हैं। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

किसी पर किया गया जरूरत से ज्यादा भरोसा भी आपको मुसीबत में डाल सकता है, हर किसी से कुछ बातें छिपाकर रखना ही समझदारी है

2 months ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
राजनीति और अर्थशास्त्र के महान नीतिकारों में चाणक्य का नाम सबसे आगे है। नंदवंश के राजा धनानंद को सत्ता से हटाकर चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाने वाले चाणक्य का एक नाम विष्णु गुप्त भी था। अर्थशास्त्र के विद्वान चणक का पुत्र होने के कारण उन्हें चाणक्य कहा जाता था। इन्हें ही आचार्य विष्णु शर्मा भी कहा गया है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

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कोई निकली जमीन है तो कोई मिली नदी और जंगल से, अनोखी है भगवान श्रीकृष्ण की 7 मूर्तियां

22 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 2 और 3 सितंबर को है। ये उत्सव पूरे देश में बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है, विशेष तौर पर मथुरा, वृंदावन आदि स्थानों पर। वृंदावन वह स्थान है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने बाललीलाएं की व अनेक राक्षसों का वध किया। यहां श्रीकृष्ण के विश्वप्रसिद्ध मंदिर भी हैं। आज हम आपको 7 ऐसी चमत्कारी श्रीकृष्ण प्रतिमाओं के बारे में बता रहे हैं, जिनका संबंध वृंदावन से है। इन 7 प्रतिमाओं में से 3 आज भी वृंदावन के मंदिरों में स्थापित हैं, वहीं 4 अन्य स्थानों पर प्रतिष्ठित हैं-   1. गोविंददेवजी रूप गोस्वामी को श्रीकृष्ण की यह मूर्ति वृंदावन के गौमा टीला नामक स्थान से वि. सं. 1592 (सन् 1535) में मिली थी। उन्होंने उसी स्थान पर छोटी सी कुटिया इस मूर्ति को स्थापित किया। इनके बाद रघुनाथ भट्ट गोस्वामी ने गोविंदजी की सेवा पूजा संभाली, उन्हीं के समय में आमेर नरेश मानसिंह ने गोविंदजी का भव्य मंदिर बनवाया। इस मंदिर में गोविंदजी 80 साल विराजे। औरंगजे..
                 

चेन्नई के माता मंदिर में मिलता है बर्गर, ब्राउनी और सैंडविच का प्रसाद, मशीन में टोकन डालते ही पैकेट में मिलता है ये अनोखा प्रसाद

25 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। हिंदू धर्म में भगवान को भोग लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इस भोग को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांट दिया जाता है। अब तक आपने लड्डू, हलवा, खीर या अन्य कोई मिठाई के प्रसाद के बारे में सुना या देखा होगा, लेकिन तमिलनाडू की राजधानी चेन्नई में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भक्तों को प्रसाद के रूप में बर्गर, ब्राउनी और सैंडविच का प्रसाद दिया जाता है। ये है वो मंदिर भक्तों को प्रसाद के रूप में बर्गर और सैंडविच देने वाला मंदिर है जय दुर्गा पीठम। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता ही यहां दिया जाने वाला अनोखा प्रसाद है। भक्त इस मंदिर के प्रसाद के बारे में सुनकर दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर की स्थापना करने वाले हर्बल ऑन्कोलॉजिस्ट के. श्री श्रीधर का मानना है कि प्रसाद के रूप में किसी भी चीज का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते वह श्रद्धा और पवित्रता से बनाया गया हो। इस तरह के प्रसाद में कोई बुराई नहीं है। प्रसाद के पैकेट पर लिखी होती है एक्सपायरी डेट जय दुर्गा पीठम मंदिर से प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले सभी खाद्य पदार्थ एफएसएसआई द्वारा प्रमाणित होते हैं,  वहीं इन..
                 

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जानिए कब पति को अपनी पत्नी और घर अच्छा नहीं लगता

26 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
शास्त्रों के अनुसार किसी व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक 16 महत्वपूर्ण संस्कार बताए गए हैं। इन्हीं संस्कारों में से विवाह संस्कार सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है। विवाह के बाद वर और वधू का ही नहीं बल्कि दो परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल जाता है। अधिकांश परिस्थितियों में विवाह पति-पत्नी दोनों को ही सुख और समृद्धि प्रदान करता है लेकिन कुछ लोग के लिए शादी परेशानियों का कारण भी बन जाती है। किसी पति के लिए पत्नी कब समस्याओं की वजह बन जाती है, इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने एक सटीक नीति बताई है... नीचे दी गई लिंक्स पर भी क्लिक करें... पढ़िए खास चाणक्य नीतियां जानिए हल्दी से जुड़ी ऐसी बातें और उपाय जो बहुत कम लोग जानते हैं ऐसे जानिए किसी भी स्त्री का स्वभाव और आदतें महीने में 2 बार करेंगे सिर्फ ये 1 काम तो दूर हो जाएगा मोटापा ऐसी इंडेक्स फिंगर वाला व्यक्ति होता है किसी राजा के जैसा आटे का ये 1 चमत्कारी उपाय करेंगे तो आप भी हो जाएंगे मालामाल जानिए सोने का समय और दूध, दही से जुड़ी बातें, जिनसे महालक्ष्मी होती हैं अप्रसन्न पति को ऐसे समय में ही मालूम होता है कैसी है... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के ल..
                 

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दक्षिण भारत में है भगवान गणेश का एक खास मंदिर, 270 फीट ऊंची चट्टान पर है मौजूद , रामायण काल से जुड़ा है इसका इतिहास

27 days ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. भगवान गणेश का उच्ची पिल्लयार मंदिर तमिलनाडू के तिरुचिरापल्ली (त्रिचि) नामक स्थान पर रॉक फोर्ट पहाड़ी की चोटी पर बसा बसा हुआ है। यह मंदिर लगभग 273 फीट की ऊंचाई पर है और मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 400 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। पहाड़ों पर होने की वजह से यहां का नजारा बहुत ही सुंदर और देखने योग्य होता है। सुंदरता के साथ-साथ यहां की एक और खासियत इस मंदिर से जुड़ी कहानी भी है। कहा जाता है इस मंदिर की कहानी रावण के भाई विभीषण से जुड़ी है।   मंदिर से जुड़ा इतिहास कहा जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने अपने भक्त और रावण के भाई विभीषण को भगवान विष्णु के ही एक रूप रंगनाथ की मूर्ति प्रदान की थी। विभीषण वह मूर्ति लेकर लंका जाने वाला था। वह राक्षस कुल का था, इसलिए सभी देवता नहीं चाहते थे कि मूर्ति विभीषण के साथ लंका जाए। सभी देवताओं ने भगवान गणेश से सहायता करने की प्रार्थना की। उस मूर्ति को लेकर यह मान्यता थी कि उन्हें जिस जगह पर रख दिया जाएगा, वह हमेशा के लिए उसी जगह पर स्थापित हो जाएगी। चलते-चलते जब विभीषण त्रिचि पहुंच गया तो वहां पर कावेरी ..
                 

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हर अमावस्या पर भगवान शिव और पूर्णिमा पर माता पार्वती जाती हैं इस पर्वत पर, यहां रहते हैं स्वामी कार्तिकेय, लिखा है शिवपुराण में

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में मल्लिकार्जुन का स्थान दूसरा है। यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नामक पर्वत पर स्थित है। शिवपुराण के अनुसार, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग शिव तथा पार्वती दोनों का संयुक्त स्वरूप है। मल्लिका का अर्थ पार्वती और अर्जुन शब्द भगवान शिव के लिए प्रयोग किया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जो मनुष्य इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है तथा उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।   ऐसे स्थापित हुआ ये ज्योतिर्लिंग शिवपुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती और भगवान शिव के मन में अपने दोनों पुत्रों कार्तिकेय व श्रीगणेश के विवाह का विचार आया। यह जान कर कार्तिकेय व श्रीगणेश पहले विवाह करने की जिद करने लगे। तब भगवान शिव व माता पार्वती ने उनके सामने शर्त रखी कि तुम दोनों में से जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा कर लौटेगा, उसी का विवाह पहले होगा। यह सुनते ही कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करने चल दिए, लेकिन श्रीगणेश ने वहीं पर शिव-पार्वती की परिक्रमा कर यह सिद्ध कर दिया कि माता-पिता..
                 

राजस्थान के धौलपुर में है 1000 साल पुराना शिवलिंग, वैज्ञानिकों के लिए भी है आश्चर्य का विषय, आज तक कोई नहीं खोज पाया इस शिवलिंग का सिरा

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. राजस्थान के धौलपुर जिले में लगभग 1000 साल पुराना एक शिवलिंग स्थापित है। इसे बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। यह शिवलिंग और इससे जुड़ा चमत्कार न की सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी जिज्ञासा का केन्द्र बना हुआ है। धौलपुर जिले में राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थापित यह शिवलिंग अचलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। ये अपने आप में बहुत खास है क्योंकि यह शिवलिंग न की सिर्फ दिन में तीन बार रंग बदलता है बल्कि इसका कोई अंत भी नहीं है। कहा जाता है कई लोगों ने जमीन के बहुत नीचे तक खुदाई करके इस शिवलिंग का अंत ढ़ूंढ़ने की कोशिश की, लेकिन आज तक कोई सफल नहीं हो पाया।   किस समय रहता है शिवलिंग का कौन सा रंग सुबह के समय इसका रंग लाल, दोपहर को केसरिया और रात को काला हो जाता है। इस शिवलिंग के रंग बदलने के पीछे बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं। वैज्ञानिकों ने भी इस शिवलिंग के रंग बदलने के रहस्य का पता लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन विज्ञान भी यहां होने वाले चमत्कार के आगे हार गया। रोज दिन में 3 बार होने वाले चमत्कार को देखने के लिए यहां हर समय भक्तों..
                 

सहाद्रि पर्वत पर स्थित है भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, कैसे पड़ा इसका ये नाम, कुंभकर्ण के बेटे से जुड़ी है ये पूरी कहानी

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क। श्रावण में ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का विशेष महत्व है। 12 प्रमुख ज्योतिर्लिगों में भीमाशंकर का स्थान छठा है। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे से लगभग 110 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति को समस्त दु:खों से छुटकारा मिल जाता है। यहीं से भीमा नदी भी निकलती है। महाशिवरात्रि और प्रत्येक माह में आने वाली शिवरात्रि में यहां पहुंचने के लिए विशेष बसों का प्रबन्ध किया जाता है।     भीम राक्षस का वध किया था भगवान शिव ने शिवपुराण के अनुसार, पूर्वकाल में भीम नामक एक बलवान राक्षस था। वह रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण का पुत्र था। जब उसे पता चला कि उसके पिता की मृत्यु भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम ने की है तो वह बहुत क्रोधित हुआ। विष्णु को पीड़ा देने के उद्देश्य से उसने ब्रह्मा को तप कर प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा से वरदान पाकर वह राक्षस बहुत शक्तिशाली हो गया और उसने इंद्र आदि देवताओं को हरा दिया। इसके बाद उसने पृथ्वी को जीतना आरंभ किया। यहा..
                 

यही है वो जगह जहां कामदेव को शिव ने किया था भस्म, आज भी मौजूद हैं निशान

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
  रिलिजन डेस्क. सती ने जब खुद को यज्ञकुंड में जला लिया तो उनकी मृत्यु से दुःखी शिव ने समाधि लगा ली थी। लंबे समय तक समाधि में रहने से देवताओं पर दैत्यों के आक्रमण बढ़ गए। तारकासुर नाम के दैत्य को वरदान था कि उसे भगवान शिव का पुत्र ही मार सकता है। सती की मृत्यु के बाद शिव समाधिस्थ हो गए थे सो तारकासुर को पूरा यकीन था कि अब उसकी मौत नहीं हो सकती क्योंकि शिव दूसरा विवाह करेंगे नहीं, पुत्र होगा नहीं। तब देवताओं ने शिव को समाधि से जगाने की ठानी। उनके मन में फिर विवाह की इच्छा जागे इसलिए कामदेव को ये जिम्मेदारी दी कि वो शिव को जगाएं।   कामदेव ने समाधि में बैठे शिव पर अपना काम बाण चलाया। बाण लगने से शिव ने आंखें खोली। कामदेव को देखकर वो क्रोधित हुए। अपना तीसरा नेत्र खोला और कामदेव को भस्म कर दिया। ये पौराणिक कथा है लेकिन माना जाता है, जिस जगह शिव समाधि में बैठे थे, जहां कामदेव को भस्म किया था। वो जगह आज भी मौजूद है।  जिसे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में कामेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, यह शिवपुराण मे वर्णित वही जगह है जहां भगवान शिव ने भगवान काम..
                 

सावन का पहला सोमवारः उज्जैन के ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर ने भक्तों को दिए पहली सवारी के दर्शन

one month ago  
समाचार / दैनिक भास्कर/ Jeevan Mantra  
रिलिजन डेस्क.  सावन मास के पहले सोमवार को उज्जैन (मध्य प्रदेश) के ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की पहली सवारी निकली। भगवान महाकाल के श्री मनमहेश स्वरूप पालकी में सवार होकर शहर के प्रमुख मार्गों से निकले। पहली सवारी के दर्शन करीब 2 लाख लोगों ने किए। पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सोमवार को दोपहर 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधिवत पूजन-अर्चन के बाद भगवान श्री मनमहेश अपने निर्धारित समय शाम 4 बजे पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। इसके पहले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजन किया। फिर महाकालेश्वर की पालकी को अपने कंधों पर भी उठाया। पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर को सलामी दी गई। सलामी देने के बाद पालकी नगर भ्रमण की ओर रवाना हुई।   सभी फोटो - काईद जौहर, उज्जैन Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today..
                 

शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार को काली गाय को खिलाएं बूंदी के लड्डू, करियर में मिल सकती है सफलता

2 months ago  
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शनिवार को शनि और हनुमानजी का दिन माना जाता है इसीलिए इस दिन इनकी पूजा का विशेष महत्व है। ज्योतिष के अनुसार शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार श्रेष्ठ दिन है। इस दिन किए गए उपायों से शनि के दोष शांत हो सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन हनुमानजी की पूजा करने से शनि के अशुभ फलों से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से कई लोग शनिवार को हनुमानजी की पूजा करते है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..
                 

घर में लगानी चाहिए हंस की तस्वीर, सुख- समृद्धि के लिए वास्तुशास्त्र में बताई हैं ऐसी ही कुछ बातें

2 months ago  
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हम अपने घर को सजाने के लिए कई तरह की तस्वीरें लगाते हैं जो कई बार हमारे जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। अगर आप वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में तस्वीर लगाएंगे तो इससे घर में सकारात्मक उर्जा का संचार बढ़ेगा और घर में खुशहाली आएगी। इसके अनुसार घर में हंस की तस्वीर लगाने से पैसों की कमी नहीं होती। आइए ऐसी ही तस्वीरों के बारें में जानते हैं, जिन्हें लगाने से अच्छा प्रभाव पड़ता है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें..